Lord Ganesh

He Left

He left for his watery abode, the lord with a tumid trunk, leaving behind the thunder and silence of drums.

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तमस

ढूंढ़ता रहा वो कुछ दिन के स्याह पहरों में काली रात की नहरों में हर तरफ  शून्य में लटकी थी एक दुर्गन्ध पत्ते थिरक तो रहे थे पर हवा से नहीं, सदमे से सिसक रहा था चाँद कहीं आसमां के मन में उगने का झरोखा न था पूरब में न पच्छिम में बस एक सूरज था […]

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